लफ़्ज़ों मे पिरोना आया नहीं

o aayethe mere dar pe
isk ka bayan kar na sake
dil ki baat dil me raha gayee
lafjo me pirona aaya nahin
वो आए थे मेरे दर पे
ईश्क का बयां कर न सके
दिल कि बात दिल में रह गइ
लफ़्ज़ों में पिरोना आया नहीं।
by- विजया शर्मा

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बुझने का नाम न लेती

Yaadon ko dafnane se kya hoga
aag banke sulagti rahati hai
es aag ko dafnaye kaise
jo bughne ka naam na letee.

यादों को दफ़नाने से क्या होगा
आग बनके सुलगती रहती है
इस आग को दफ़नाए कैसे
जो बुझने का नाम न लेती।
by- विजया शर्मा

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कहीं लग न जाए

A mohini adayen aueor jadugarni ka najar
Jadu ka hunar to koe unse sikhe
nigahon ki teer se bar mat karna
shise ka dil a kahin lag na jaye.

ए मोहिनी अदाएँ और जादुगर्नी का नजर
जादू का हुनर तो कोई उनसे सिखे
निगाहों कि तीर से बार मत करना
शिसे का दिल ए कहीं लग न जाए।
by- विजया शर्मा

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फुलों कि लाली चेहरे पे आ गई

gulsan me haba ke jhonke ne fulon ko lahara diye
titali ke rangeen pankh sajaye mai bhi lahara gayee
kisine balon me ful laga diye
yeise chounk gayee ki fulon ki lali chehare pe
aagayee
गुलशन में हबा के झोंके ने फुलों को लहरा दिए
तितली के रंगीन पंख सजाए मैं भी लहरा गई
किसी ने बालों में फुल लगा दी,
ऐसे चौंक गइ कि फुलों कि लाली चेहरे पे आ गई।
by- विजया शर्मा

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कहीं मेरी जान न निकले

रास्ते में चलते चलते उनके ख़यालों में खोने लगे
यहाँ गर मिलगए तो कहीं मेरी जान न निकले।

raste me chalte chalte unke khayalo me khone lage
yahan gar milgaye to kahin meri jaan na nikle.

by- विजया शर्मा

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पास आकर भी लौट चले

मोहब्बत के दरवाज़े पर कोइ परदा न था
पर उनके दिल में नक़ाब था
वो मेरे नज़दीक होकर भी दूर थे।
हम उनके पास आकर लौट चले।

mohabbat ke darbaje par koe parda na tha
par unke dil me nakab tha
o mere najdik hokar bhi door the
ham unke paas aakar lout chale.

by- विजया शर्मा

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