प्रेरक बनो

प्रेरक बनो
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(स्वरचित)

कुछ तो ऐसा कर जाऊं ।
किसी न किसी का तो प्रेरक बन जाऊं।।

आखिर इतनी लंबी जिंदगी में कुछ तो अच्छा कर ही सकता हूं।
चाहता भी हूं, पर निष्क्रिय बन अवसर को तकता हूं।।

सत्कर्म के अनगिनत अवसर प्रतीक्षारत है ।
कष्ट पीड़ा अभाव असंतुष्टि का सिलसिला अनवरत है।।

आरंभ का प्रारंभ कर शीघ्रातिशीघ्र आगे बढ़ो ।
समय मुट्ठी में रेत की तरह छुटता जा रहा है
प्रयत्नों से परिणाम प्राप्त कर प्रेरक बनो ………
🙏🏻 आगे बढ़ो आगे बढ़ो🙏🏻

by- आलोक बिल्लौरे

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हर मौसम ढोते रहना है

कुछ यादें ऐसी भी होती है सोने नहीं देती
जिया नहीं जाता जिन्दगी हर मौसम ढोते रहना है

kuch yaaden aiesi bhi hoti hai sone nahin deti
Jiya nahin jata jindagi har mousam dhote rahana hai.

by-Vijaya Sharma

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कुछ भी अल्फ़ाज़ न जाना

चाँदनी जैसी है वो आई मेरे आँगन में
उसका मुझमें समा जाना
हाले दिल बयान करुं कैसे
कुछ भी अल्फ़ाज़ न जाना।

Chandani jaisi hai o aaye mere aangan me
us ka mugha me sama Jana
haale dil bayan karun kaise
kucha bhi alfaj na jana.

by-Vijaya Sharma

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राहों को देखा न होता

क़िस्मत मे गर तुम न होते
ए जिन्दगी सँवारा न होता
तेरे घर की ओर जानेवाली
राहों को देखा न होता।

kismat me gar tum na hote
a jindagi sanvara na hota
tere ghar ki or janebali
rahon ko dekha na hota
by-Vijaya Sharma

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बार बार मरना ओर जीना

tute huye riston me
kante bahut chuv jate hain
es divanepan ka kya kahana
bar bar marna aour jina

टूटे हुए रिस्तों में काँटे बहुत चुभ जाते हैं
इस दिवानेपन का क्या कहना बार बार मरना और जीना।

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मैं वरदास्त न कर पाऊँ

इस क़दर छुना न मुझे कहीं मैं हार न जाँउ
तुम्हारे हाथों का रखना मैं बरदास्त न कर पाऊँ

es kadar chuna na mughe kahin mai haar na jaaun
Tumhare hathon ka rakhana mai bardast na kar paaun

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