हल चलाता खेतों में हर भूखे पेट का अरमान हूँ

हल चलाता खेतों में हर भूखे पेट का अरमान हूँ
कभी तो अपना समझो यारों इसी देश का किसान हूँ

बदल्ती हैं जब सरकारें तब बनजाता हूँ मतदाता
आता हूँ नज़र चुनावों में ,कहलाता हूँ अन्नदाता
खिलौना समझ न खेलो मुझसे में भी तो इंसान हूँ
कभी तो अपना समझो यारों इसी देश का किसान हूँ

आए होली जाए दिवाली, में खुद भूखा सोजाता हूँ
रोदेता हूँ जब अपनों को पेड़ों पे लटका पाता हूँ
सिखादो लड़ना हालातों से दुनिया से अनजान हूँ
कभी तो अपना समझो यारों इसी देश का किसान हूँ

नहीं हे कपडा बदन पे मेरे छत भी आंसू बहाती हे
सुनी पड़ी हे रससोई मेरी,बस मटकी पानी पिलाती हे
क्या होगा कल बच्चों का यही सोच के में परेशान हूँ
कभी तो अपना समझो यारों इसी देश का किसान हूँ

हल चलाता खेतों में हर भूखे पेट का अरमान हूँ
कभी तो अपना समझो यारों इसी देश का किसान हूँ
Written By-J N Mayyaat

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बुझने का नाम न लेती

Yaadon ko dafnane se kya hoga
aag banke sulagti rahati hai
es aag ko dafnaye kaise
jo bughne ka naam na letee.

यादों को दफ़नाने से क्या होगा
आग बनके सुलगती रहती है
इस आग को दफ़नाए कैसे
जो बुझने का नाम न लेती।
by- विजया शर्मा

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कहीं लग न जाए

A mohini adayen aueor jadugarni ka najar
Jadu ka hunar to koe unse sikhe
nigahon ki teer se bar mat karna
shise ka dil a kahin lag na jaye.

ए मोहिनी अदाएँ और जादुगर्नी का नजर
जादू का हुनर तो कोई उनसे सिखे
निगाहों कि तीर से बार मत करना
शिसे का दिल ए कहीं लग न जाए।
by- विजया शर्मा

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