हल चलाता खेतों में हर भूखे पेट का अरमान हूँ

हल चलाता खेतों में हर भूखे पेट का अरमान हूँ
कभी तो अपना समझो यारों इसी देश का किसान हूँ

बदल्ती हैं जब सरकारें तब बनजाता हूँ मतदाता
आता हूँ नज़र चुनावों में ,कहलाता हूँ अन्नदाता
खिलौना समझ न खेलो मुझसे में भी तो इंसान हूँ
कभी तो अपना समझो यारों इसी देश का किसान हूँ

आए होली जाए दिवाली, में खुद भूखा सोजाता हूँ
रोदेता हूँ जब अपनों को पेड़ों पे लटका पाता हूँ
सिखादो लड़ना हालातों से दुनिया से अनजान हूँ
कभी तो अपना समझो यारों इसी देश का किसान हूँ

नहीं हे कपडा बदन पे मेरे छत भी आंसू बहाती हे
सुनी पड़ी हे रससोई मेरी,बस मटकी पानी पिलाती हे
क्या होगा कल बच्चों का यही सोच के में परेशान हूँ
कभी तो अपना समझो यारों इसी देश का किसान हूँ

हल चलाता खेतों में हर भूखे पेट का अरमान हूँ
कभी तो अपना समझो यारों इसी देश का किसान हूँ
Written By-J N Mayyaat

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लफ़्ज़ों मे पिरोना आया नहीं

o aayethe mere dar pe
isk ka bayan kar na sake
dil ki baat dil me raha gayee
lafjo me pirona aaya nahin
वो आए थे मेरे दर पे
ईश्क का बयां कर न सके
दिल कि बात दिल में रह गइ
लफ़्ज़ों में पिरोना आया नहीं।
by- विजया शर्मा

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उनसे लुट जाना unse lut jana

हमें नाज है उनका इस क़दर आना
ईश्क में शामिल होने कि इजाज़त माँगना
और मेरी चाहत ईश्क को दोबारा करना
पसन्द करते हैं उनसे लुट जाना।
hame naaj hai unka es kadar aana
isk me shamil hone ki ejajat mangna
auor meri chahat isk ko dobara karna
pasand karte hai unse lut jana.
by- VijayaSharma

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