वो थी आसमान कि चाँद

कस्तूरी थी वो महका के चली गई
उसकि खुसबु से फ़िज़ाएँ महक उठी
उस मृगनयनी को ढुढ़ु मैं दिन रात
टूटकर बिखर गया वो थी आसमान कि चाँद।

kasturi thee o mahaka ke chali gayi
uski khusbu se fijayen mahak uthi
us mrignayani ko dhunu mai din raat
tutkar bikhar gaya o thee aasman ki chaand.

by- विजया शर्मा

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लम्बी जुदाई

लम्बी जुदाई और काली रातें
जी रहे थे पल पल मरके
सुरज उगा था पुरब से
देखन पाए थे हम उसे।

दर्द क्यों होता है दिल में कोई जुदा हो जाता है
प्यार करने कि जुर्म में सज़ा जैसे काटते हैं।

लम्बी होती है क्यों रातेंसमझ न पाए हम कभी
जुदाई कि गाँठ को अकेले खोलते रहे।
by- विजया शर्मा

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तमाशा नेपाली शायरी

संगै हिडने क़सम थियो, उसले बाटो आर्कै लियो
हाँस्तै हाँस्तै उ हिड्यो म तमाशा हेरि रहें।

sangai hidne kasam thiyo,usle bato aarkai liyo
hanstai hanstai u hindyo m tamasha heri rahen.
by- Vijaya sharma

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याद आती है

काले बादल से ढके रात के सन्नाटे में
आँखें भरी भरी हो जाती है
वो दिन………
कभी रजामन्दी हुआ करती थी
पूर्ब से आई पहली रोशनी का वो उजालाथा
by- विजया शर्मा

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