याद आती है

काले बादल से ढके रात के सन्नाटे में
आँखें भरी भरी हो जाती है
वो दिन………
कभी रजामन्दी हुआ करती थी
पूर्ब से आई पहली रोशनी का वो उजालाथा
by- विजया शर्मा

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