चुनावी माहौल

ना मंदिर छोड़ा, ना मस्जिद छोड़ी ना छोड़ा इंसान,
इतना नीचे गिर गया जो कहने लगा शमशान…
गंगा-जमुनी की धरती पर ये कैसा खेल है भाई,
मजहब-फजहब के चक्कर में क्यों बाट रहे हो भाई…
हिन्दू भी परेशां मुसलमां भी परेशां क्यों नही दिखता भाई,
हाथ जोड़ कर विकास करेंगे क्यों नही कहते भाई।
ना मंदिर छोड़ा, ना मस्जिद छोड़ी ना छोड़ा इंसान…!

by- Gopi Arora

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yaaden

#पुरानी तस्वीरों को देखकर पुरानी बातें याद आ जाती है ।।
#डूबी हुई लब्जे फिर से उभर आती है ।
#मन तो होता है फिर से भूतकाल में जाने का ।
#पर गुजरी हुई वक़्त कभी वापिस नहीं आती है ।।
(*#By अजीत*#)

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जिन्दगी के हर काम को

जिन्दगी के हर काम को हम तुमसे पूछ के करेगे
गम तुम्हारे सारे लेलेगे और खुशी तुम्हारे नाम पर करेगे

तूमक्या जानो तूम हमारे लिए भेजे गये हो इस जहां में
दर्दो अलम खुशी वो गम सब मिलकर तुम्हारे साथ सहेगे।

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खुद ही से नफरत

ऊस पल जब खुद ही से नफरत को प्यार में बदलने की कोशिश नाकामयाब होती नज़र आये।

ऐसे हर पल को जिंदा दफना देना ही समझदारी है।

by-ममता छाबरिया

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आसमां में मत दूंढ अपने सपनों को

आसमां में मत दूंढ अपने सपनों को,
सपनों के लिए ज़मीं भी जरूरी है,
सब कुछ मिल जाए तो जीने का क्या मज़ा,
जीने के लिये एक कमी भी जरूरी है..

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