प्रेरक बनो

प्रेरक बनो
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(स्वरचित)

कुछ तो ऐसा कर जाऊं ।
किसी न किसी का तो प्रेरक बन जाऊं।।

आखिर इतनी लंबी जिंदगी में कुछ तो अच्छा कर ही सकता हूं।
चाहता भी हूं, पर निष्क्रिय बन अवसर को तकता हूं।।

सत्कर्म के अनगिनत अवसर प्रतीक्षारत है ।
कष्ट पीड़ा अभाव असंतुष्टि का सिलसिला अनवरत है।।

आरंभ का प्रारंभ कर शीघ्रातिशीघ्र आगे बढ़ो ।
समय मुट्ठी में रेत की तरह छुटता जा रहा है
प्रयत्नों से परिणाम प्राप्त कर प्रेरक बनो ………
🙏🏻 आगे बढ़ो आगे बढ़ो🙏🏻

by- आलोक बिल्लौरे

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