साइनो छुटाउ कसरी

अझैपनि उ आंउछ कि भन्ने आस छ
कति सपनाहरु उ संग टांसिएको छ
ती राम्रा कल्पनाहरु अरुसंग बांडु कसरी
उ संगको साइनो छुटाउ कसरी।
by- विजया शर्मा

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फुलों कि लाली चेहरे पे आ गई

gulsan me haba ke jhonke ne fulon ko lahara diye
titali ke rangeen pankh sajaye mai bhi lahara gayee
kisine balon me ful laga diye
yeise chounk gayee ki fulon ki lali chehare pe
aagayee
गुलशन में हबा के झोंके ने फुलों को लहरा दिए
तितली के रंगीन पंख सजाए मैं भी लहरा गई
किसी ने बालों में फुल लगा दी,
ऐसे चौंक गइ कि फुलों कि लाली चेहरे पे आ गई।
by- विजया शर्मा

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चुनावी माहौल

ना मंदिर छोड़ा, ना मस्जिद छोड़ी ना छोड़ा इंसान,
इतना नीचे गिर गया जो कहने लगा शमशान…
गंगा-जमुनी की धरती पर ये कैसा खेल है भाई,
मजहब-फजहब के चक्कर में क्यों बाट रहे हो भाई…
हिन्दू भी परेशां मुसलमां भी परेशां क्यों नही दिखता भाई,
हाथ जोड़ कर विकास करेंगे क्यों नही कहते भाई।
ना मंदिर छोड़ा, ना मस्जिद छोड़ी ना छोड़ा इंसान…!

by- Gopi Arora

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कहीं मेरी जान न निकले

रास्ते में चलते चलते उनके ख़यालों में खोने लगे
यहाँ गर मिलगए तो कहीं मेरी जान न निकले।

raste me chalte chalte unke khayalo me khone lage
yahan gar milgaye to kahin meri jaan na nikle.

by- विजया शर्मा

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वो थी आसमान कि चाँद

कस्तूरी थी वो महका के चली गई
उसकि खुसबु से फ़िज़ाएँ महक उठी
उस मृगनयनी को ढुढ़ु मैं दिन रात
टूटकर बिखर गया वो थी आसमान कि चाँद।

kasturi thee o mahaka ke chali gayi
uski khusbu se fijayen mahak uthi
us mrignayani ko dhunu mai din raat
tutkar bikhar gaya o thee aasman ki chaand.

by- विजया शर्मा

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nepali shayari by Vijaya Sharma

कति खोजें त्यो बिर्सन नसकिने उजेली रात
दिन आइसकें छ अब त सम्झना मात्र छ
हाम्रो समर्पण को कथा बोकेको त्यो रात
एउटा सुखद मिलनको क्षण भएको थियो।

kati khoje tyo birsna nasakine ujeli raat
din aae sake cha abata samjhana matra cha
hamro samarpan ko katha bokeko tyo raat
auuta sukhada milan ko chann bhayeko thiyo.

by- Vijaya Sharma

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पास आकर भी लौट चले

मोहब्बत के दरवाज़े पर कोइ परदा न था
पर उनके दिल में नक़ाब था
वो मेरे नज़दीक होकर भी दूर थे।
हम उनके पास आकर लौट चले।

mohabbat ke darbaje par koe parda na tha
par unke dil me nakab tha
o mere najdik hokar bhi door the
ham unke paas aakar lout chale.

by- विजया शर्मा

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